शासन की संवेदनशील पहल से साकार हुआ दिव्यांग बेटियों के विवाह का सपना

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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना उन बेटियों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आई है, जिनके जीवन में आर्थिक या शारीरिक चुनौतियों के कारण विवाह एक सपना ही रहा जाता है। ऐसी ही जिले के दिव्यांग बेटियों की कहानी है जिनका जीवन योजना से नई दिशा पा सका।
जिले के विकासखण्ड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत कोदवा निवासी सुषमा 60 प्रतिशत पैर से दिव्यांग हैं। सामाजिक और आर्थिक स्थिति के कारण दिव्यांग बेटी के विवाह को लेकर परिवार को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। समय बीतता जा रहा था समय के साथ सुषमा 32 वर्ष की हो गई और सुषमा का दुल्हन बनने का सपना अधूरा ही प्रतीत हो रहा था। ऐसे समय में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत सुषमा का विवाह संपन्न हुआ। शासन की इस योजना ने न केवल विवाह की समस्त व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कीं, बल्कि सुषमा के जीवन में नई शुरुआत का विश्वास भी जगाया। विवाह उपरांत सुषमा ने भावुक होकर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों राज्य सरकार हर बेटी के साथ खड़ी है। और उनके सपनों को पूरा करने में सहयोग कर रही है।
इसी तरह विकासखण्ड कुसमी के ग्राम पंचायत गोपीनगर निवासी अंजिला सुनने और बोलने में अक्षम हैं। उनकी दिव्यांगता के कारण परिवार को बेटी के विवाह को लेकर गहरी चिंता थी। अंजिला के पिता श्री छेदी राम बताते हैं कि बेटी की दिव्यांगता और आर्थिक कठिनाइयों के चलते बेटी का विवाह कर पाना उनके लिए अत्यंत कठिन था। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से जब अंजिला के विवाह का अवसर मिला तो बेटी के शादी का सपना साकार हुआ। श्री छेदी राम ने कहा कि योजना दिव्यांग बेटियों के लिए भी सम्मान के साथ जीवन की नई शुरुआत का माध्यम है। वे कहते है कि शासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं ने उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से राहत दी है। उन्होंने मकर संक्रांति के परब पर बेटी के विवाह के लिए मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सुषमा और अंजिला जैसी बेटियों का विवाह संवेदनशील शासन का सशक्त उदाहरण भी है। जो संदेश देती है कि प्रदेश की कोई भी बेटी परिस्थितियों के कारण पीछे न रह जाए शासन हर कदम पर उनके साथ है।

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