एआई और मोबाइल युग में भी मानसिक गणना के मिसाल बने 72 वर्षीय व्यापारी कन्हैयालाल अग्रवाल

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रामानुजगंज आज के एआई और मोबाइल के युग में जहाँ आमजन साधारण जोड़-घटाव के लिए भी कैलकुलेटर और मोबाइल पर निर्भर हो चुके हैं, वहीं रामानुजगंज नगर के 72 वर्षीय वरिष्ठ व्यापारी कन्हैयालाल अग्रवाल आज भी बिना किसी तकनीकी सहायता के लंबा से लंबा हिसाब पलक झपकते ही जुबानी जोड़ लेते हैं। उनकी यह अद्भुत क्षमता न केवल लोगों को आश्चर्यचकित करती है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है।
कन्हैयालाल अग्रवाल वर्षों से व्यापार से जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, उन्होंने अपने व्यापारिक जीवन की शुरुआत ऐसे समय में की थी जब न तो कैलकुलेटर आसानी से उपलब्ध थे और न ही डिजिटल साधन। उस दौर में हिसाब-किताब पूरी तरह दिमाग से किया जाता था। यही अभ्यास धीरे-धीरे उनकी आदत और फिर उनकी विशेष पहचान बन गया।
वे बताते हैं कि उन्होंने शुरू से ही जोड़-घटाव, गुणा-भाग मानसिक रूप से करने का अभ्यास किया और कभी कैलकुलेटर पर निर्भर नहीं रहे। आज भी वे बिना किसी मशीन की मदद के बड़ी रकम का हिसाब तुरंत लगा लेते हैं। उनकी यह दक्षता देखकर लोग अक्सर दंग रह जाते हैं और उन्हें “चलता-फिरता कैलकुलेटर” भी कहते हैं।
कन्हैयालाल अग्रवाल का मानना है कि मानसिक गणना न केवल दिमाग को तेज रखती है, बल्कि स्मरण शक्ति और एकाग्रता को भी मजबूत बनाती है। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर होना ठीक नहीं। यदि दिमाग का उपयोग बंद कर दिया जाए, तो उसकी क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है।
नगरवासियों का कहना है कि कन्हैयालाल अग्रवाल केवल एक व्यापारी ही नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं। उनकी यह कला आज के डिजिटल दौर में यह संदेश देती है कि तकनीक सहायक हो सकती है, विकल्प नहीं।
एआई और मोबाइल के इस आधुनिक समय में कन्हैयालाल अग्रवाल जैसे लोग यह सिद्ध करते हैं कि अभ्यास, निरंतरता और आत्मविश्वास से मानव मस्तिष्क आज भी किसी भी मशीन से कम नहीं है।

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