आज से लागू हो रहे ये तीन नए कानून, चांदो थाना प्रभारी भापेंद्र साहू द्वारा CRPF भवन में लोगों को दी गई कानून से संबंधित जानकारियां…..
*आज यानी एक जुलाई से देशभर में तीन नए कानून लागू हो रहे हैं. थाना चांदो प्रभारी भापेंद्र साहू द्वारा कार्यशाला का आयोजन कर लोगों को नए कानून से संबंधित जानकारियां दी गई.*
बलरामपुर चांदो:- जिले के चांदो थाना में आज सोमवार को तीन नए प्रमुख आपराधिक कानूनों के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस दौरान आमजनों को नए कानूनों के संबंध में जानकारी दी गई, इस दौरान तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और चांदों क्षेत्र के सभी सरपंच, सचिव, बीडीसी, एवं उप सरपंच सहित आमजन भी मौजुद रहे l
*आमजनों को दी गई जानकारी:* तीन नए आपराधिक कानून के बारे में कार्यशाला आयोजित कर आम जनों को प्रभारी भापेंद्र साहू द्वारा विस्तार से बताया की अभी तक तो देश में भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और 1872 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम सक्रिय चल रहा था, लेकिन अब *भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)* है.
अभी भी इस समय सभी के मन में सवाल यह होगा कि आखिर तीन कानून के लागू होने के बाद असल में क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं। तो आपको सिंपल 10 पॉइंट में समझा देते हैं कि आखिर इन तीन नए कानून की वजह से आखिर क्या बड़ा परिवर्तन होने वाला है।
नंबर 1- आपराधिक मामलों के जितने भी फैसला सुनाए जाते हैं, उनमें पहले सुनवाई के बाद फैसला देने में 60 दिन तक लग जाते थे, लेकिन अब यह अवधि 45 दिन की होने जा रही है यानी की 15 दिनों की कटौती।
नंबर 2- बलात्कार पीड़ितों का जब भी मेडिकल किया जाएगा, हर कीमत पर 7 दिनों के अंदर में रिपोर्ट आनी होगी।
नंबर 3- जो नए कानून लागू हुए हैं उसमें अब बच्चों को खरीदना या बेचना जगन्य अपराध माना जाएगा। इसी तरह अगर नाबालिक के साथ बलात्कार होता है तो आजीवन कारावास या फिर मृत्यु दंड की सजा भी मिल सकती है।
नंबर 4- अब अगर शादी के झूठे वादे कर महिला को छोड़ दिया जाएगा तो इसको लेकर भी दंड के सख्त प्रावधान कर दिए गए हैं।
नंबर 5- चाहे आरोपी हो या फिर पीड़ित, दोनों को 14 दिनों के अंदर में पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट मिलने का पूरा अधिकार रहने वाला है।
नंबर 6- महिलाओं के खिलाफ जब अपराध होगा तब सभी अस्पतालों को मुफ्त में इलाज करना होगा, अगर बच्चों के साथ अपराध होंगे तब भी अस्पताल मुफ्त इलाज के लिए बाध्य रहेंगे।
नंबर 7- इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही किसी भी मामले में FIR दर्ज की जा सकेगी, पहले की तरह पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं रहेगी। अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर भी अगर वो चाहे तो FIR दर्ज करवा पाएगा।
नंबर 8- अगर गंभीर अपराध होंगे तो फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का घटनास्थल पर जाना जरूरी होगा, पहले जरूरत के मुताबिक यह फैसले लिए जाते थे।
नंबर 9- लिंग की परिभाषा में ट्रांसजेंडर समाज के लोगों को भी शामिल कर लिया गया है। इससे समानता को बढ़ावा मिलेगा और जमीन पर स्थिति बदलेगी।
नंबर 10- महिला पीड़िता के बयान को यथासंभव महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाना चाहिए। बलात्कार जैसे मामलों में ऑडियो-वीडियो माध्यम से बयान दर्ज होने चाहिए। यह बात जानना भी जरूरी
इन सब के अलावा आपको यह भी पता होना चाहिए कि अब नए कानून में कई धाराएं भी बदल दी गई हैं। उदाहरण के लिए अब बलात्कार की धारा 375 और 376 नहीं रहने वाली है, इसी जगह सर्फ धारा 63 रहेगी। वही अगर सामूहिक बलात्कार का मामला होगा तो धारा 70 लगेगी। इसी तरह हत्या होने पर अब धारा 302 नहीं लगने वाली है, उसकी जगह 101 ने ले ली है। तीन नए कानून लागू होने के बाद 41 अपराधों में सजा की अवधि को बढ़ा दिया गया है, 82 अपराधों में जुर्माना ज्यादा कर दिया गया है। मॉब लिंचिग और कुछ दूसरी ऐसी घटनाओं को लेकर भी नए अपराध बना दिए गए हैं।