वायरल वीडियो से सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मानवीय आधार पर बाद में जारी हुई चेकबुक

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वायरल वीडियो से सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मानवीय आधार पर बाद में जारी हुई चेकबुक
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में एक किसान का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में किसान अपने गंभीर रूप से बीमार पिता के इलाज के लिए समय पर बैंक से पैसे नहीं निकाल पाने की पीड़ा जाहिर करता नजर आ रहा है। मामला सामने आने के बाद पत्रकार द्वारा बैंक प्रबंधन से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे किसान की पहचान जोगी यादव के पुत्र उमेश यादव के रूप में हुई है। उमेश यादव ने बताया कि उनके पिता जोगी यादव गंभीर किडनी बीमारी से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। इलाज के लिए बड़ी राशि की आवश्यकता थी, जिसके लिए उन्होंने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रामानुजगंज शाखा से चेकबुक के माध्यम से राशि निकालने का प्रयास किया, लेकिन चेकबुक समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उमेश यादव का आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम से चेकबुक के लिए आवेदन किया था, लेकिन बैंक द्वारा कई बार आवेदन निरस्त कर दिया गया। इसके चलते समय पर इलाज के लिए आवश्यक धनराशि नहीं मिल सकी, जिससे उनके पिता की तबीयत पर प्रतिकूल असर पड़ा।
मामले को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रामानुजगंज शाखा के ब्रांच मैनेजर लल्लू राम यादव ने बताया कि 30 दिसंबर 2025 को चेकबुक के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन की जांच के दौरान यह सामने आया कि आवेदन पत्र पर किए गए हस्ताक्षर जोगी यादव के वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खा रहे थे। बाद में जब स्वयं जोगी यादव से हस्ताक्षर कराकर सत्यापन किया गया, तो दोनों हस्ताक्षरों में स्पष्ट अंतर पाया गया।
ब्रांच मैनेजर के अनुसार, जोगी यादव अपनी बीमारी और शारीरिक कमजोरी के कारण स्वयं हस्ताक्षर करने की स्थिति में नहीं थे, जिससे आवेदन में फर्जी हस्ताक्षर की आशंका उत्पन्न हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक नियमों के अनुसार फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर चेकबुक जारी करना संभव नहीं है। हालांकि, गंभीर बीमारी और उम्र को देखते हुए मानवीय आधार पर अंततः चेकबुक जारी कर दी गई। इस दौरान इलाज बाधित न हो, इसके लिए बीच-बीच में चार बार आंशिक भुगतान भी किया गया।
वहीं, उमेश यादव ने बताया कि उन्हें पिता के इलाज के लिए रांची ले जाना था, जिसके लिए लगभग तीन लाख रुपये की आवश्यकता है। पर्याप्त राशि एक साथ उपलब्ध न होने के कारण इलाज में काफी दिक्कतें आईं। उनका कहना है कि समय पर चेकबुक जारी हो जाती तो इलाज में देरी नहीं होती और पिता की हालत इतनी नहीं बिगड़ती।
फिलहाल चेकबुक जारी होने के बाद मामला शांत हुआ है, लेकिन यह घटना सहकारी बैंकों की प्रक्रियाओं और जरूरतमंद खाताधारकों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े करती है।

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